Saturday, August 10, 2019

"आध्यात्मिक स्वास्थ्य" : रेकी ग्रेंड मास्टर्स हैंडबुक : स्वास्थ्य एवं समृद्धी की कुंजी

"आध्यात्मिक स्वास्थ्य" :

रेकी ग्रेंड मास्टर्स हैंडबुक :
स्वास्थ्य एवं समृद्धी
की कुंजी

 

 

अवचेतन मन की ताकत से




 नुष्य द्वारा प्रकृति को नियंत्रित करने के प्रयास में; पशुओं, सब्जियों, फसलों का स्वास्थ्य गिर गया हैऔर स्थिति और जटिल हो गई है। एक विशाल रूप से, स्वास्थ्य की जगह बीमारियों ने ले ली है। इससे मामला ऐसा बिगड गया कि, अनेक बीमारियोंने  इंसान को पकड़ लिया।

शारीरिक बीमारी, मानसिक बीमारी आधुनिक मानव जीवन का अभिन्न अंग बन गई है।
जेट स्पीड के युग में, कोई भी एक सेकंड के लिए इंतजार करने के लिए तैयार नहीं है। रोगी तेजी से ठीक होने के लिए डॉक्टरों पर दबाव डालना शुरू कर देते हैं  और डॉक्टर दवा कंपनियों को रोगी को तेजी से ठीक करने के लिए, भले साइड इफेक्ट्स होते है, ड्रग्स बनाने के लिए कहते हैं।

मानव ने प्राकृतिक प्रणाली में अराजकता पैदा की है जिसके परिणामस्वरूप बीमारीयाँ पैदा  हुई है।
इसके अलावा, प्राकृतिक जल संसाधन, जैसे झील, नदी और समुद्र प्रदूषित कर दिये  हैं।
विकास के नाम पर, पहाड़ों और जंगलोंको मानव नष्ट कर रहा है।

वायु प्रदूषण, जल प्रदूषण, ध्वनि प्रदूषण सब कुछ हमारे स्वास्थ्य को और भी गिरा रहा है।
बीमारी का एकमात्र उपाय पारलौकिक रेकी है
 
शारीरिक स्वास्थ्य, मानसिक स्वास्थ्य के साथ-साथ आध्यात्मिक स्वास्थ्य जरूरी है!
हर कोई शारीरिक स्वास्थ्य,  मानसीक स्वास्थ्य के बारे में जानता है लेकिन आध्यात्मिक स्वास्थ्य के बारे में कुछ भी नहीं।

पश्चिमी दार्शनिक, आध्यात्मिक स्वास्थ्य के बारे में बहुत कम जानते हैंजहाँ  भारतीय दार्शनिकों ने 'आध्यात्मिक स्वास्थ्य' पर बहुत संशोधन किया है।

इस आधुनिक दुनिया में, मनुष्य रोगों पर शोध करने में व्यस्त हैं। हर कोई बीमारी पर काम कर रहा है। यही बात मनुष्यों के लिए एक खतरा है।

पुराने दिनों में, लोगों को स्वास्थ्य की चिंता थी, न कि बीमारियों की। इसलिए वे खुश थे, जीवन का आनंद ले रहे थे। आज की दुनिया में साठ प्रतिशत लोग रोगोंकी दहशत में जीवन व्यतित कर रहे हैं जिसे बहुत प्यारे नाम से जाना जाता है, “हेल्थ अवेअरनेस

तब आध्यात्मिक गतिविधियाँ सभी के जीवन का अभिन्न अंग थीं। खाने की आदतें, भोजन, संगीत और कलाएँ सब कुछ आध्यात्मिकता से संबंधित था।

आधुनिक विश्व में केवल 10%  परिवार नियमित रूप से आध्यात्मिक गतिविधियाँ कर रहे हैं।
तथाकथितआधुनिक समाज आध्यात्मिक गतिविधि को पिछड़ेपन के प्रतीक के रूप में लेता है।
मनुष्य प्रकृति को नियंत्रित करने की कोशिश कर रहा है। वे जानवरों, सब्जियों, फसलों पर प्रयोग कर रहे हैं, बदले में मनुष्य को प्रदूषित वस्तुएँ ही मिल रही हैं।

आध्यात्मिक और धार्मिक दोनों अलग-अलग शब्दावली हैं।आध्यात्मिक का मतलब धार्मिक नहीं है। एक धार्मिक गतिविधि का अर्थ आध्यात्मिक गतिविधियों से नहीं है।

एक आध्यात्मिक गतिविधि का अर्थ पैरा-मानसिक गतिविधि भी नहीं है।यह एक प्राचीन विज्ञान है, जो अद्भुत परिणाम देता है।मानव, जीवन में मानसिक और आध्यात्मिक विकास एक लय में करता है।आध्यात्मिक स्वास्थ्य की श्रृंखला में पारलौकिक रेकी महत्वपूर्ण है। इसका कारण हमारा 98% स्वास्थ्य हमारी अंदरुनी शक्ति पर निर्भर करता है।

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